सिलसिला बातो का ख्यालो का (दिल में आया ख्याल तो बस लिख दिया !!)
चलते फिरते बिना प्रयोजन से लिखी बातो का सिलसिला !!
Saturday, 29 March 2008
इक बात
इक बात कहनी थी
इक बात कहकर आया हूँ
अभी चांद से ज़मीन पे
कुछ देर पहले आया हूँ
पहले पहले प्यार मे
अक्सर ऐसा होता है
चांद पे रोज़ जाते हैं क़दम
चांद से रोज़ आते हैं हम
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