Thursday, 29 January, 2009

दुआ


देख लो सपना कोई
कोई
कहने लगा
जाने किसकी है ये दुआ
पिघला पिघला रहने लगा

फूलो के जैसा मौसम हुआ
रंग
कोई रूह में भरने लगा
जाने किसकी है ये दुआ
पिघला पिघला रहने लगा

तुम खुदा बनके छाने लगे
दिन
मेरे अब गाने लगे
आस्मां
दिल में समाने लगे
जाने किसकी है ये दुआ
पिघला पिघला रहने लगा

झरने के जैसा बहता है मन
जाने
कौन बांधे है मन
रुत ये हसीं बनके उड़ने लगी
सोई
सोई आंखे जागने लगी

आँखों में कोई समाने लगा
खुदा भी नज़र आता लगा
जाने किसकी है ये दुआ
पिघला पिघला रहने लगा

Tuesday, 20 January, 2009

तीन गहने


फूलो के बाग़ का है ये वादा
मुस्कुराने का कर इरादा
हँस तू खिलते फूलों की तरह
जिंदगी से जुड़
महकती फिजा की तरह
तेरी हसी से वादियाँ हसे
तेरी खुशी में नदियाँ मुडे
तेरे गालो से झरने बहे
गीत कोई गुनगुना
बिन कहे ही मुस्कुरा
तेरे लबो पर हसी का बोसा
देगा हसने का फूलो को मौका
जिंदगी फ़कत दुश्वारियां नही
जिंदगी गीत भी है
जियो हसो प्यार करो ,
ज़िन्दगी नई बहार करो
खुलो मिलो खुश रहो
ज़िन्दगी गुलज़ार करो
जीना, हसना, प्यार करना
ज़िन्दगी के ये तीन गहने
जो भी पहने
जिंदगी लगे गाने हसने

Saturday, 17 January, 2009

सुबोह


जन्नत ने जैसे खिड़की खोली
सुबह यूँ हँस के बोली
सूरज की पहली किरण से
ख्वाब जागे नींद से
परिंदों की बोली से
जागे रोम रोम कायनात के
ज़मी पे ये नज़ारे जन्नत के
हर सुबह देती है नया इरादा
ताजी हवा का झोंका खोले
दिल का झरोखा
सुबह की परी लायी खुशी
सुबह की परी लायी हसी
मुस्कुराये अब सवेरे
ये नज़ारे सब हैं तेरे

Tuesday, 13 January, 2009

पुण्या की रेल


चक्के चक्के दौडम भाग
नींद में थक गए हम आज
ख्वाबो में एक रेल चलायी
छुक छुक करती रेल भगायी

जंगल जंगल दौडी रेल
छुक छुक करती भागी रेल
चक्के चक्के दौडम भाग
नींद में थक गए हम आज

रेल संग गिलहरी दौडे
दांतों में अखरोट दबाये
अपनी रेल में बैठी कोयल
प्यारा प्यारा गाना गाये

हाथी बैठे ,बैठे शेर
बैठे चिडिया और बटेर
मैना गहना पहने बैठे
रेल में नाचा देखो मोर
चल पड़ी रेल अगले छोर

भालू सिग्नल देता है
सी सी सीटी देता इंजन
चंदू बन्दर कूदे धम धम
रेल में करता ऊधम

चक्के चक्के छुक छुक छुक
रेल गाये छुक छुक छुक
पुण्या मुनिया रानी की रेल
करती दखो कितने खेल

पटरी पटरी भागे सरपट
सरपट सरपट खटपट खटपट
स्टेशन देखो आए झटपट
रुक रुक जाए छुक छुक रेल

मीठी मीठी निंदिया जाए
सर्र सर्र कर हवा लहराए
छुक छुक करती चलती रेल
टुक टुक करती मटके रेल

चक्के चक्के दौडम भाग
नींद में थक गए हम आज
ख्वाबो में एक रेल चलायी
छुक छुक करती रेल भगाई

Thursday, 1 January, 2009

जीवन है रौशनी


है पलक पर रौशनी , फलक पर चाँदनी
बाहें
खोल के देख ले ,जीवन है रौशनी

बदल ले ख़ुद को तू ,उड़ चल हवा के संग
तू
नदी की हिलोर , जीवन की तू रागनी

विश्वाश है तू , तू है आकाश
इस
फलक पर तू ,सूरज का उजास

तू हवा का झोंका है ,किसने तुझे रोका है
बढे जो कदम तेरे , कदमो में आकाश है

कोई नयी बात जगा ,कोई नया गीत बना
ख्वाबों
को सच बना ,ज़िन्दगी को जीत बना

नई
उमंग भर ले , नई सुबह कर ले
आज ख़ुद से ये वादा कर ले ,


(आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनायें )