Friday 29 February 2008

मुमकिन

चांद हथेली पर रहता है
आकाश का बिछौना रहता है
तारों कि चादर होती है
इश्क मे ख्वाब मे
सब कुछ मुमकिन होता है !!

इंटरनेट पे

मिट जाएगा इक रोज़ निशा दुनिया मे
पर रह जाएगा नामों निशा
इंटरनेट पे
फ़ना हो जाए चाहे मेरी हस्ती दुनिया मे
रह जाएगा नमो निशा
इंटरनेट पे
धड़कती सवेंदना से माउस को थामना
मेरी डायरी के पन्नों पे चले आना
मे मिल जाऊंगा गुनगुनाते गीतों की
तरह इंटरनेट पे

मेरे पास

उनको हक है कि वो हुकूमत करे मेरे दिल पर
मैं हर हुक़म उनका रखता हूँ सर माथे पर
मेरा दिल बस उन्ही की मल्कियत
इसके सिवा कुछ ओर भी तो नही
मेरे पास

एक वादा

एक वादा चांद करता है
चांदनी से रोज़ रात
चुपके चुपके
चांदनी भी अलसाई अंगडाई लेकर
मान लेती है वो वादा
चुपके चुपके
आगोश मे जब भरता है चांद
वो यद् दिला देती है वादा
चुपके चुपके
आस्मान नज़ारा करता है
हर रात चांद के मिलन का
चांद को लगता है
उसे कोई देखता है
चुपके चुपके

लेट कट

तुम कोचिंग से आ रही थी
मैं मैदान मे खेल रहा था
तुम को आता देख मैंने सोचा
आज तुमको दूँ सलामी बल्ले से
लेट कट शाट लगाया था मैंने
जो गेंद को ले गया तुम्हारे
कदमों तले !!

Thursday 28 February 2008

लाजवाब है

इश्क की किताब है
आशिक के सर पर ताज है
उसकी नज़र से देखो
ज़िंदगी लाजवाब है

पुराने पन्नों से

खूबसूरत सफर है चलते रहिये
जितना भी कटे काट लीजिये

परेशानी का सबब जानकर होगा क्या
ज़िंदगी को मदहोशी से भी पी लीजिये

कोई तारों को टकटकी लगाये उम्र खपाता है
कोई तारों की खयाली मे सुकून पता है

परवरदिगार तेरे राज़ अजीब हैं
ऐसे मे ये नाचीज़ क्या चीज़ है

उसे क्या हुआ मालूम नही
सुना है उसे भी मालूम नही है

फुरसत मे मिलने की बात करता है
पर कभी फुरसत मे नही मिलता है

शबे नूर पर चांद ही एक हूर है
तारें कई पर सब के सब इससे दूर हैं

होश रहा किसे कितना
कई बार ये सवाल ख़ुद से भी पूछना

पुराने पन्नों से निकल कर आई है ये बात
मिजाज़ मे कुछ नया नही
पर बात तो नयी ज़रूर है !!

Tuesday 26 February 2008

चाय का प्याला

चाय की दुकान पे चाय
का खाली प्याला
मेरी याद तो लाता होगा !!

Monday 25 February 2008

माँ का प्यार !

रुत बदले मौसम बदले
बदले नही माँ का प्यार !!

क़दम दर क़दम चले
बनकर हमदम
माँ का प्यार !!

उजाले

अब उजाले चारो ओर नज़र आतें हैं
जब से तुम बने मेरे हमनवां

मैं कोशिश मे हूँ कि को समंदर कर दूँ
मैं कोशिश मे हूँ कि तारों को नज़र कर दूँ

चंद रोज़ मे बदल जाएगा ये मंज़र
यकी है संवर जाएगा मुक़द्दर

शुभ घड़ी आ रही है
ज़िंदगी गा रही है !!

Saturday 23 February 2008

हैप्पी बर्थ डे तनु !!

आज तनु का पांचवा जन्म दिन है !!
तनु को जन्म
दिन की ढेर सारी बधाई !!
सुनके जंगल मे भालू की तान
जंगल हुआ परेशान
जल्दी से कोयल को लाओ
उसको बोलो कुछ गाओ !!
बन्दर ने सीखा नाच और गाना
सबकी की खुशी का नही ठिकाना !!

इबादत

मैं सजदे मे हूँ इश्क तेरे
मेरी रूह का कहना है कि
तू मेरा मसीहा है ।

तेरी नजरो मे खुदा है
तेरी यही बात सबसे जुदा है

मैं सजदे मे हूँ इश्क तेरे
मेरी रूह का कहना है कि
तू मेरा मसीहा है

तेरी इबादत से खुदा रूठ जाए
मुझे डर नही ,मुझे यकीन है
खुदा को भी तुझ मे खुदा नज़र आता होगा

फ़िर भला कैसे एक खुदा दुसरे खुदा से रूठेगा
मेरी इबादत मुक्कमल है मेरी रूह का कहना है

मैं सजदे मे हूँ इश्क तेरे
मेरी रूह का कहना है कि
तू मेरा मसीहा है

ज़माना चाहे मुझे काफिर कह दे
चाहे फ़िर फतवे दे दे
मैं चाहूँगा खुदा मेरी इस गुस्ताखी पे
मुझे माफी दे दे .......

रुसवा हो जो खुदा तो तेरा दामन मिल जाएगा
तू अगर रुसवा हो जाए तो खुदा भी रूठ जाएगा

तेरे जिस्म मे आके ली थी सांसे मैंने
मेरी माँ मेरी ज़िंदगी
इस दुनिया मे तुझसा हसीं कौन मुझे मिल पायेगा ?
मुझे ये मालूम न था कि तुझ मे ही मुझे खुदा मिल जाएगा !!

मैं सजदे मे हूँ इश्क तेरे
मेरी रूह का कहना है कि
तू मेरा मसीहा है !!

तुम मिलो

इश्क के सिलसिले
जनम जनम तक मिले

तुम मिलो हम मिले
इस गगन के तले

चाहतों के सिलसिले
यूहीं चले यूहीं चले

तुम्हारी आगोश मे
खुशियों के गुल खिले

प्यार की बाते प्यार के ख़त
ऐसी ही सौगते मिलती रहे

चाहतों के सिलसिले
यूहीं चले यूहीं चले

तुम्हारे साथ ही कायनात हसीन
लगती है , मुझको साथ मिले जो तेरा
तो हार भी जीत लगती है !!

तुम मिलो हम मिले
इस गगन के तले

चाहतों के सिलसिले
यूहीं चले यूहीं चले

Wednesday 20 February 2008

चादर

चांद ने ओढ़ रखी थी
बादलों की चादर
जैसे उसको भी सर्दी लगती हो

मौसम गरमी का आते देख
चांद ने छोड़ दी बादलों की चादर !!

Tuesday 19 February 2008

मन

मन नही करता
कुछ भी लिखूं
इसलिए बस
ऐसे ही
नमस्ते
और
सलाम !!

चलते चलते

जीवन का क्या है चलता जाएगा
फिर एक रोज़ रुक जाएगा

कभी मन निराशा से डूब जाता है
और कभी आशा में गीत गाता है

आज जो है कल नही होगा
ज़िन्दगी में पता नहीं कब क्या होगा

अब तो कोई इशारा करो
मैं थक गया इस तरह चलते चलते

(sent mail to trishna jan2007)

ज़िन्दगी का रँग

"ज़िन्दगी का रँग"

जब मन का मीत मिले
तब जीवन गीत बने
सुर बने साज़ बने
जीवन एक आवाज़ बने.

मैं अब भी इंतज़ार करता हूँ तेरा ज़िन्दगी,
आ मेरे पास तू इक जीत की शक़्ल में.
मेरे मन का दर्पण अब भी कोरा है,
जब भी आ ,आजा अपनी शक़्ल देख ले.

तेरा इंतज़ार ही सही मेरी ज़िन्दगी का हासिल,
ये बात और की तेरी ज़िन्दगी अब वैसी नही.

कभी तू भी दिल लगाना और देख लेना,
दिल लगाकर तुझसे मैने क्या खोया.
मैं अपनी तडप आप हूँ,

अपने दर्द की खुद ही आवाज़ हूँ.
तू जान भी ले और मान भी ले,
दिल लगाना कोई हसी खेल नही .

ये जो मेला था बिछुड गया,
एक हिस्सा था कभी छूट गया .
पर्दे में क्यों छिप जाती हो ,

मै ही तो इक राज़दाँ हूँ,
मुझसे क्या छिपाती हो.

खुद को खोया तो खुदा मिला,
अपना वज़ूद अब जुदा हुआ....

(sent mail to trishnaji july 2007)

Saturday 16 February 2008

हवाले

वो चाहे तो अब क़त्ल कर दे
वो चाहे तो अब दफन कर दे
ये अब उनकी ही मर्जी है
वो चाहे जैसा मेरा अंजाम कर दे !!

मैं तो बस उनकी राहों मे ही चल दिया
क्या हुआ जो मेरी इस बात पर
ज़माना जल गया

मैं तो बस उनका ही हूँ अब यारो
वो चाहे तो मुझे अपने दिल मे बसा ले
या कि दिल से निकाले

अब ये तो उनको ही तय करना है
मैंने तो कर दी ज़िंदगी अब उनके हवाले

कोई आ जाता है

जब ज़िंदगी मे कोई आ जाता है
सारा आलम ही हसीं नज़र आता है

ज़िंदगी बन जाती है गुलशन
चारो ओर बस सनम ही नज़र आता है

मयखाने से कोई भी लौटा नही आज तलक
बिन पिए
जब कोई आ जाता है तो दिल पे सुरूर छा जाता है !!

Friday 15 February 2008

नटराज

नृत्य
मे
लीन
शिव
ध्यान
मे
लीन
शिव

शिव

शिव
है
मगन
सृष्टी
भी
मगन
मगन
नटराज
के नृत्य
मे
एक
शांती
एक
तांडव

शिव

ज़ंग

ज़ंग नही होने देना
मुफ्त का गम नही लेना

जो मज़ा सुकून मे है
वो मज़ा ही लेना
ज़ंग नही होने देना
ज़ंग नही होने देना

देखोगे ख्वाब

हकीकत भी होंगे
सच भी होंगे
देखोगे ख्वाब तो पूरे होंगे !!

ज़मीन पे उतर आयेगी जन्नत
सच भी होंगे
देखोगे ख्वाब तो पूरे भी होंगे !!

ज़िंदगी को मत जीना कभी
होकर उदास
रूखी रूखी रुठी रुठी
मत रखना दिल की किताब

रंग भी होंगे तरंग भी होगी
जिन्दगी पूरी पूरी लगेगी
एक दिया जलाना
ख़ुद पर एतबार का

एक लौ जलाना एक लगन लगाना
जिन्दगी को बनाने की
हर नूर मिलेगा
हर लम्हा खुशी की सौगात लाएगा

खुश रहोगे तुम तो सारा आलम
सारा मंज़र हसीन नज़र आएगा

सच होंगे पूरे होंगे
देखोगे ख्वाब तो पूरे भी होंगे !!

Thursday 14 February 2008

दीवार

एक दीवार दुनिया की
एक दीवार तुम्हारी
रोक लेती है
टोक देती है

बहने से हवाओं को

रोक लेती है
टोक देती है

खिलने से फूलों को
रोक लेती है
टोक देती है
पत्तो को गुनगुनाने से

रोक लेती है
टोक देती है
आस्मान को शामियाने बनाने से

दीवार दीवार दीवार ......
हम सबके भीतर
कभी कोई बना देता है
कभी हम बना देते है
दीवार दीवार दीवार

रोक लेती है
टोक देती है

परवाज़ को उड़ने से
बच्चो को पतंग उड़ाने से
साजो को सुनाने से
आवाज़ को सच बताने से !!

तोड़ दो फोड़ दो
अपने भीतर बाहर और
इर्द गिर्द की हर दीवार को !!!

हवाओं को आने दो
परवाज़ को उड़ने दो
बच्चो को पतंग उड़ाने दो
साजो को संगीत बिखेरने दो

आवाज़ को सच बताने दो
फूलों को खिलने दो
कलियों को मुस्कुराने दो !!

खिलती

खिलती मुस्कान हो तुम
खिलते फूलों की तरह
तुम्हारी बातें जुदा है
सबसे ......
तुम जुदा हो सबसे

दिल को हर बार यही महसूस होता है
तुमसे मिलकर ....
कोई भी नही तुमसा नही है
इस पूरी कायनात मे !!

तुम्हारी मुस्कान /संगेमरमर का बदन
सैकडो फूलों की महक /क्या खूब
बला का हुस्न तुम्हारा है

मिलेंगे

कल मिलेंगे परसों मिलेंगे
सिलसिला वफा का चलता रहा तो
हम बरसों मिलेंगे !!

सावन मे मिलेंगे भादो मे मिलेंगे
बसंत और पतझड़ मे मिलेंगे
तुमने प्यार से गले लगाया तो
हम बरसों मिलेंगे !!

गम तुम्हारे ले लूँ
दिल कहता है
खुशी तुमको दे दूँ
दिल कहता है
दिल से दिल की बातें
हो जाए मुक्क़मल
हम सदियों तक
जन्मों जन्मों तक
यू हीं मिलेंगे !!

गठरी

एक गठरी समान की
एक गठरी यादों की

लेकर आया गाँव से मैं

यादों की गठरी बोझ नही मन पे
समान की गठरी बोझ क्यों लगती है ?

होली

रंग उड़ा था उस होली मे
कायनात भी रंगो से नहाई थी

मैं भीगा था प्यार मे तेरे
तू भी तो रंगो मे नहाई थी !!

आँगन

आंगन आज भी वही है
आँगन मे लगे दरख्त भी वही हैं

सब कुछ वैसा ही है जैसा पहला था

फर्क इतना बस कि

अब तू भी नही वहां पर
मैं भी नही वहां पर

यादो के गलियारे से
मायूस लौट के आया हूँ

पर यादो मे कहीं तेरा जिक्र नही
ऐसी तो बात नही !!

मैं रहूँ कही भी
तू हमेशा मेरे साथ मे हैं !!

Wednesday 13 February 2008

माँ

हजार मील दूर से भी जान जाती है

कि पीठ मे दर्द है
मैंने खाना नही खाया

मैं लापरवाही करता हूँ

वक़्त से उठता नही
वक़्त पे सोता नही

अकेलेपन से ऊब जाता हूँ

मेरी ऐसी ही कितनी बातें हैं
जो चाहकर भी तुझसे

छिपती नही हैं

माँ !!

Tuesday 12 February 2008

फनकार

न तारीफ़ से गदगद होता है
न गाली से आहत होता है

सच्चा फनकार तो बस अपनी ही
धुन मे रहता है !!


बसंत

मौसम की तरंग है
फूलों पे रंग है
वसुधा के कण कण मे
तरंग है
ये बसंत है
ये बसंत है
मन पुलकित है
हर्षित है .....
जीवन की ताजी ताजी
ये पतंग है ॥
ये बसंत है
ये बसंत है

रंग

ऋतु बसंत की
मन मे लाती तरंग है

पूरी वसुधा पे छाया ये किसका रंग है !!

कोयल गाती बौर पे
फूल खिलते हर छोर पे

इस ओर उस ओर
चहुँ ओर फैला मनभावन रंग है

बसंत है बसंत है

वर देवी का स्वर है
बसंत तो मन का रंग है

Monday 11 February 2008

चिंगारी

एक चिंगारी जलाओ
अपने भीतर
ताकि मिट सके
अंतःकरण का अंधकार

जलाओ जलाओ
जलने के लिए
हो जाओ तैयार

तस्वीर बदलना है
हालात बदलना है

अभी तो और दूर चलना है !!

Sunday 10 February 2008

सागर की बात

मेरे परम मित्र अमित के सागर की एक रचना जो मुझे बेहद पसंद है ........

कुछ ग़मों के दीये कभी नहीं बुझेंगे
जले बारम्बार-ये अश्क नहीं थमेंगे

बचपन का छत से गिर जाना
फिर मौत का आना
लहू की आखिरी बूंद तक तड़पना
फिर मेरा मर जाना
ये सिलसिले कभी नहीं थमेंगे
कुछ ग़मों के दीये कभी नहीं बुझेंगे

खिलोनों के टूटने पर
मेरे रूठने पर
दिलासा देती थी "दादी"
ये फिर से जुड़ जायेंगे
और नए फिर लायेंगे
वो खिलोनें मेरे घर में
अब कभी नहीं बनेंगे
कुछ ग़मों के दीये कभी नहीं बुझेंगे

जिन उंगलियों का सहारा नहीं
दर्द क्यों उनका भी गंवारा नहीं
कभी "पा" कहते हैं कभी "पापा"
कहने से क्या है मगर ए-"सागर"
वो आह! तक नहीं भरेंगे
कुछ ग़मों के दीये कभी नहीं बुझेंगे

------------(अमित के. सागर) ५-१२-०७

मेल से

तन्हाई अपनी मिटटी से मैं ज्यादा दिन न सह पाउँगा
इक रोज़ उडके मैं वही जाना
चाहूँगा

जला जब कतरा कतरा तो याद तुम्ही आये
वो सावन के झूले और बागों
के पत्ते गुनगुनाये

दिल समन्दर है इसमें आके डूब जा
या जा कहीं और
फिर वापस मत आ ....

तुम जिसे अपना कहो कोई भी नहीं ऐसा
पागल डेरा है ये या
मैं खुद पागल जैसा

सच सिर्फ सच होता है कुछ और नहीं
खबर ये ताज़ा
है कुछ और नहीं !!

(मार्च २००७ मे अपने मित्र तृष्णा को भेजी गयी एक मेल )

कोहराम

कुछ तो करो कुछ तो करो
बड़ी देर से खामोश हो

चुप रहोगे इतना तो कोई
भी अफसाना नही बनेगा
जिंदा रहने के लिए चिल्लाना
ज़रूरी है
जिन्दगी की यही बस मजबूरी है

खामोश न रहो
कोहराम मचा दो
खामोश न रहो
कोहराम मचा दो !!

खुदा

खुदा आज खुश है
ढेर सारे बच्चो के साथ
वो बन गया बच्चा जबसे
खुदा सा लगने लगा !!

पैमाइश

दिल की हसरत है ,पूरी ज़रूर होगी
दिल से चाहा है जैसे वो बात मुक्कमल होगी

पैमाइश की हसरत है , वजूद भी साबित हो जाएगा
फिक्र कैसी आज जो जिक्र नही कहीं पर भी अपना

एक वक़त ऐसा भी आएगा
जब हर तरफ अपनी ही बात होगी .

आईना देखकर घर से निकलते नही
चेहरा जो पहचाना सा लगता है

रूह से खुद को देख लिया
खुद से खुद की मुलाक़ात भी होगी .

ज़िंदगी के माने अभी अधूरे ही सही
हमने कभी भी इस बात का बुरा नही माना

ज़िंदगी का दीदार भी होगा पूरा पूरा
ये आरजू भी पूरी होगी !!

नही गम नही ख़ुशी एक सादगी ही झलकती है
ख़ुशी और गम से भी बड़ी बात पूरी होगी .

चांद रात

चाँद रात है
हवा भी सर्द है
ख़ुशी का मेरी ठिकाना नही
तू भी तो क़रीब है

दिल

मेरी हर सौगात तुम्ही से है
दिल की बात तुम्ही से है
तुम मेरी ज़िंदगी के माने हो
दिल से दिल की चाँद रात तुम्ही से है !!

Saturday 9 February 2008

बाबा

बाबा वेलेन की कुर्बानी
आशिकी को इतना बढ़ा देगी
जेब भरेगी
गिफ्ट बनाने वालो की
और मासूम मुहब्बत
बाज़ार मे अपना मोल
नही पाएगी ?

सोचता होगा

लैला का दीवाना मजनू भी सोचता होगा
हीरा का राँझा भी सोचता होगा
प्यार करके क्या गुनाह किया उसने
ज़माना उनके नही किसी और के नाम पर
प्यार का दिन मना रह होगा ?

बोल

बोल नही पा रहा हूँ
राय नही दे पा रहा हूँ
क्या करूं माहौल ही ऐसा है
खुद से आज शर्मा रहा हूँ !!

रस्म

रस्म ए उल्फत है
सो ज़रूर हम निभाएंगे
वेलेन बाबा के चेले तो नही
पर चौदह को फूल
देने आयंगे !!

Friday 8 February 2008

वफ़ा का सिलसिला

वफ़ा का सिलसिला है
ये लम्बा ही चलता जाएगा
दुश्मन बने सो बने दुनिया
ये दिल अब नही घबराएगा

अंजुमन मे

अंजुमन मे बार बार आ जाते है
दीदार अंजुम का ही नही होता
जैसे मयखाने मे शराब नही
साकी नही !!

खून

खून पी जाएगा इंटरनेट का
बचने भी नही देगा माउस
की बोर्ड थक जाएगा
सीपीयू चिल्लाता रह जाएगा
न देख सिस्टम को ऐसी
कातिल निगाह से !!

इश्तहार

एक मजाक किया किसी ने
प्यार का चर्चा मेरा तेरा
अब आता है इश्तहार की
शक्ल मे

तुम

न जाने क्यों याद आ जाती है
तुम्हारी अक्सर रात गए
मैं ढूंढ लेता हूँ तुमको
अक्सर दिल की गहराइयों मे

तबीयत

इश्क करो तबीयत से
आशिकी करो जम के
दुश्मनी करो दम से

दौर

सीख लेते थे सिखा देते थे
वो दौर वफ़ा का था !!
दोस्ती तुम्हारी नूर था खुदा का
और तुमने भी समझा हमको
इस काबिल ......

जैसा था !

पुरानी डायरी के कुछ पन्ने पलटे
बस तुम्हारा ही ज़िक्र था
ऐसा लगा बस तारीख पुरानी है
मेरा हल तो बस वैसा है
जैसा था !

दिल की ख़ुशी

बिन पिए ही सरुर है
बात तुमको ये बताना ज़रूर है
दिल खुश हो गया
तुमको जो देख लिया

Thursday 7 February 2008

सच्ची बात

दिल की बात है दिल से ही होगी
ये दुनियादारी हमसे न होगी

तुम कहा मानो सो मानो दुनिया का
मैं तो चला वहीं जा ये दिल ले चला

फिक्र क्यों करूं अब मैं ज़माने की
जब मिल गयी दिल से दिल की लगी


वो सोचते तो होंगे आज भी मेरे बारे मे
दिल की गफलत ही सही पर
ख्याल तो अच्छा है ।

जो भी सोचा वो न कहा
तेरे करीब आके न जाने क्या हुआ ?

दिल की तरफदारी न करूं तो क्या करूं
बस वो ही तो है जो कहता है अब भी
सच्ची सच्ची बात

मज़ा

उसकी हर बात जुदा है
ज़िंदगी का वो ही असली मज़ा है

देख

देख लेता है कभी कभी दिल
हसीं सा ये मंज़र
तुम मेरे साथ हो
और किनारे पे समन्दर

करीब

अब करीब आके भी दूर क्यों
लगते हो
अपनी उलझनों के सिवा कुछ
नही कहते हो

मुहब्बत

मुहब्बत ही चलन हो
मुहब्बत ही सफर
मेरी हमसफ़र साथ रहे
कटता रहे जिंदगी का सफर

मेहमान नवाजी

कालीन ही नही दिल भी बिछाया
मेहमान नवाजी का ये अंदाज़ बहुत भाया

Wednesday 6 February 2008

क्या खूब

ये जुमला ही माकूल है तेरे लिए
क्या खूब क्या खूब !!

Tuesday 5 February 2008

अच्छा

हमने देखे थे सपने जाने कैसे कैसे
तुमको दुनिया से चुरा के दूर
ले जाना चाहता था
अब हो गया जो दूर तुमसे मैं
कुछ भी तो अच्छा नही लगता

मखमल

मखमल का गलीचा बिछाने की
आरजू थी
सपने दिखाता और देखता था मैं
तुम भी नादाँ बनके कभी भी
मुझे सच से रूबरू नही होने देती थी

आधा

हर गम आधा लगता था
हर ख़ुशी पूरी लगती थी
जब थे करीब हम
जिन्दगी अधूरी तो नही
लगती थी !!

जुदाई

जुदा होने के डर से मैं घबरा जाता था
लगता था कि जी ही नही पाउँगा तेरे बिना
अब हमको बिछडे हुए हो गए कई साल
जाने कैसे जी रह हूँ मैं ?

मिलना

हम मिलते थे तो अच्छा लगता था
न मिलते तो बुरा लगता था
जाने क्या बात थी ऐसी
जब मिलते थे हम
ज़माना जलता था
नही मिलने पे ज़माने को
अच्छा लगता था

मौसम

मौसम बेकरारी का
दिल चाहता है बेईमान होना

Monday 4 February 2008

करार

ये कहाँ आके क़दम ठहर जाते है
रास्ते बहते हुए गीत गाते हैं
मिल जाता हैं सुकून
दिल को करार आ जाता है
जब भी दिल तेरी गलियों मे आता है

ज़िंदगी

कुछ हकीकत है
कुछ ख्वाब है
जैसी भी है
ज़िंदगी लाजवाब है

Sunday 3 February 2008

@ ख़त

@ लिख देता हूँ
@ पढ़ लेता हूँ
@ भेज देता हूँ
तेरे पास इन बॉक्स मे
जमा हैं सारे ख़त

जब भी

जब भी आता हूँ मैं वहाँ
तुम्हारा दीदार हो जाता है
जाने कैसे ?
मैं नही जानता
तुमको पता हो तो ई मेल कर देना
.........@जीमेल.कॉम मालूम है न !!

छिपता नही

अब कोई भी अफसाना मेरा
छिपाये छिपता नही
जिंदगी मे मेरी तुम हो
ये बात सारा ज़माना जानता है

हर ख्याल

मेरा हर ख्याल तुझसे है
सांसो की रवानी तुझ से है
और क्या कहूं मैं
जाने वफा
मेरे दिल की
धड़कन तुझ से है

राहों मे

वो वाकया भूल नही सकता
फूल जिसकी खुशबू अभी तक
हवाओं मे है
बेकरार कर देने वाली
तेरी वो अदा
अब तक मेरे दिल की
राहों मे हैं

एक बार

एक बार फिर वहीं चलते है
जहाँ मिलते थे हम कभी
तुम भी चोरी छिपे आना
अपनी सहेली को साथ लाना

जिंदगी बनी

तुम मिले तो खुशियाँ मिली
उखडी उखडी सी थी जिंदगी
तुम मिले तो जिंदगी बनी

फोन पे

क्या खूब पहचानते थे तुम हमे
की फ़ोन की घंटी बजते ही
जान जाते थे ये फ़ोन मेरा
है

ख़त

एक उम्र होती है
जब ख़त लिखते है
ख़त पढ़ते है
क्या खूब होता है
दौर ए वफ़ा

खुले बाल

खुले बाल रखकर
कभी कभी वो स्कूल
आ जाती सवेरे सवेरे
मैं ला ईन से देखता उसे
बड़ी गौर से

स्कूटर

स्कूटर पे बैठकर
वो अपने वालिद के साथ
जाती थी
उसकी अदा गज़ब ढाती थी

चूड़ी

कांच की चूड़ी नही
दिल अपना दिया था
उसने भी चाहत मे बड़ा
मज़ा दिया था

सर्द

सर्द राते है
अलाव जला लो
इस बेदर्द ठंड को
थोडा सा तपा दो

प्यार प्राइवेट है

जिन्दगी मे अपनी सब कुछ ओपन है
बस एक प्यार को छोड़कर
वो ज़रा प्राइवेट है

Saturday 2 February 2008

राधे राधे

रूह तक आते प्रेम के धागे
राधे राधे !!राधे राधे !!

झगडा

हम दोनो मे कौन है
जो दूसरे को ज्यादा प्यार करता है
हम दोनो के बीच बस इसी
बात का झगडा होता है

सजते हुए

तुम खिड़की से जब सजते हुए देखा था
वो महीना था फरवरी का
बालो को तुम बना रही थी
दो चोटी मे पीला फीता
दिखा था

आने को है

लगता है की दिलबर मेरा अब आने को है
उसकी आमद का असर हवाओं मे है
खुशबू बता रही ये मुझको
वो मेरे क़रीब आने को है

इजहार किया

तस्वीर से कहा ,सौ दफे कहा
सपने मे हजार बार कहा
कौन कहता है मैंने कभी
प्यार का इजहार नही किया

Friday 1 February 2008

सिलसिला

सिलसिला निकल पड़ा
बात जिद से शुरू हुई
और दिल भी
जिद पर अड़ गया
वो चाहे या न चाहे
दिल उनको ही चाहने लगा

अपनापन

अपनो से ही अपनापन मिलता है
ये बात और कि कभी कभी
बेगाना भी अपना लगता है

बार बार

आता है जहन मे कोई बार बार
दिल है उसकी ही चाहत मे गिरफ्तार

एक बार

हजारो बार एतबार किया
सौ बार प्यार किया
उम्र के हर मोड़ पे
न जाने क्या क्या किया ?

दिल की बात

दिल की बात है दिल मे रह जाती है
कभी कभी ही ज़ुबा पर आती है

देखो अब इशारा भी नही करती
क्या बला कि हुस्नो मल्लिका
बात बात पर बस गुस्सा करती है

ख़ुशी

खुश तो बहुत होगे तुम ???
क्या खूब कहा था बच्चन ने
ख़ुशी मिली इतनी
आज खुश तो बहुत होगे तुम

दूर

दूर रहकर भी जो पास लगता है
वही एहसास सच्चा होता है
पास रहके भी जो दूर लगे
वो कभी अपना नही होता है

प्यार

कितनी बार इस्तेमाल मे आता है
प्यार बड़ा प्यारा लगता है

रसगुल्ला

शहर मे अब ये हल्ला है
बडे पेट वाले लाला का ही
रसगुल्ला है

तुम्हारे पास

तुम्हारे पास आकर जाने का दिल नही करता
कोई दुनिया मे फिर नही दिखता
क्या यही है मुहब्बत कि
तुमसा हसीं कोई भी नही लगता

कार्टून

बच्ची कार्टून बना रही है
क्या खूब उसकी कलाकारी
वो मेरा ही चित्र बना रही है

गिले शिकवे

एक बार मिलाने आओ
फिर बैठकर शिकवे गिले करते है
आख़िर इसी बहाने ही सही
एक बार चाय पे मिलते है

दिल से

वो अक्सर किताबो कि बात करता है
किताब जैसा ही सोचता और कहता है
मेरा यकीन है वो बस किताबी है
बंद कर दो कोई उसे किताबो मे

भीगा भीगा

मौसम इस सावन मे
भीगा भीगा होगा
साजन होंगे संग तो
बारिश से भीगेगा
जो न होंगे संग
तो नैनो से
भीगा भीगा होगा