Saturday, 27 December, 2008

ख़ुद को ख़ुदा सोच के देखा


सितारों की चादर पर पैरों को पसार के देखा
शब का नूर उसकी आँखों में देखा

वो गुमशुदा सी रातें कल की बात थी
आज रात भी देखी ,सुबह को भी देखा

उसका नज़र आ जाना ही काफी है
उसके बारे में ही बस सोच के देखा

आज जब इनायत हो ही गई है तो ,
कुछ देर ख़ुद को ख़ुदा सोचके देखा

Friday, 26 December, 2008

26/11 हम सब एक हैं


26/11 महज एक तारीख नही
ये वो दर्द है जो अब तक
मेरे
सीने में जिंदा है
एक
आग बनके ,
एक
तड़प
एक टीस बनके

मेरी
बैचेनी है
26/11
एक ऐसा घाव जिसे
मैं
देख रहा हूँ रोज़
बदस्तूर
आँख मिलाके

आज एक महीने बाद
मैं
इस दर्द से आँखे अपनी
नही
भिगाऊंगा
इस
वेदना को मैं
अभी
नही भुलाऊंगा

तब तक
जब
तक
हम
वहशत का
माकूल ज़वाब दे दे

ये दर्द अब हौसला है
ये
दर्द अब फ़ैसला है

26/11 दर्द तेरा
हम
भूले नही है
दहशत के खात्मे के लिए
हम सब एक हैं

चाँद उदास है


सर्द रातों में कोहरे का राज़ है
नीली रातो का चाँद थोड़ा उदास है

कोहरे की चादर में उसे
ज़मी नही दिखती
ज़मी को देखे बिना
उसकी सांसे नही चलती

चाँद ....
कुछ उदास है
सर्द रातों में कोहरे का
राज़ है ।

सर्द राते ...
चाँद को भी लगती सर्दी
चाँद ने ओढ़ लिया
बादलों का लिहाफ

सर्दी ....
फ़िर भी जाती नही
चाँद के पास रातो में
सूरज धर दो

हथेली ....
रगड़ दो चाँद की
थोडी गर्मी जाए
नर्म गुलाबी धूप
में बैठालो चाँद को भी
अपने पास

ये राज़ ही है
चाँद कभी सोता नही
इस बात के लिए
कभी चाँद रोता भी नही

ज़मी ...
कुछ देर तू ही ज़रा
पिघल जा
चाँद के लिए
कोहरों से बाहर तू ही
निकल जा

चाँद
तन्हा रातो में घूमे है
तेरी दीद को तरसे है

Wednesday, 24 December, 2008

बड़ा दिन


खुशियों की झूमर लटके
खुशियों के तारे झलके
खुशबू से आँगन महके

रोशनी से घर दमके
चाँद से मिलने जुलने का
मौका आया
बड़ा दिन आया

बर्फ के अर्श से
बर्फ के फर्श से
सांता पैदल चलके आया
झोलों में भरके कितनी
खुशियाँ लाया

क्रिसमस ट्री पे तारे लटके
आसमान से दिखे वो हटके
हर तरफ जशन है
ये बड़ा दिन है

झरोखे पर सांता आएगा
खुशियाँ धर के जाएगा
खिड़की अपनी खोल के रखना
सांता को वेलकम कहना

सांता जिंगल बेल बजाओ
सबको तोहफे देते जाओ

विश हमारी सुनता है
पूरी करता हर मुराद
दहशत का रुक जाए फसाद
इस बार सांता हमारी यही मुराद

अमन चैन दुनिया को देना
सबकी सुनना पूरी करना
सांता हर
मुराद


विश लिस्ट लम्बी अपनी
आँखे देखे सपना सपनी
सपने जो देखे सच हों
सांता बाबा
मन की मिठास कम न हो


(आप सभी को क्रिसमस की शुभकामनायें !!!
WISH U ALL VERY HAPPY XMAS !!!)

Monday, 22 December, 2008

चाँद पे सांता


जिंगल बेल जिंगल बेल
मिलजुल खेले खेल
चाँद पर जा बैठा सांता
वहां से भेजे केक

जिंगल बेल जिंगल बेल
चाँद के संग हिलमिल गाये
अबकी बार सांता
चाँद को ही ले आए

जिंगल बेल जिंगल बेल
चाँद पर कर ले धमाल
चाँद को सर्दी में दे दे शॉल
चाँद पे घूमे चाँद पर नाचे
खुशियाँ दुनिया में बाटें

चाँद से आएगा गिफ्ट
चाँद से आएगी टाफी
थोडी देर ही वहां पे रुकना सांता
बस इतना ही है काफ़ी

हम सबके बीच में आओ
सांता हमारी मुरादे
पूरी कर जाओ

चाँद ने कैसी की है
क्रिसमस की तैयारी
अबकी बारी हमें चाँद पर ले जाओ
सांता हमें भी चाँद की सैर कराओ

जिंगल बेल जिंगल बेल
आओ दिलो को मिला ले
पूरी दुनिया में प्यार हम फैलाये

Sunday, 14 December, 2008

आज जन्म दिन पर पुण्या के लिए


आज मेरा जन्म दिन है १४ दिसम्बर ... पिछली २३ नवम्बर को हमारे घर में नन्ही पुण्या (तनु की बहन मेरी भतीजी) की आमद हुईख्वाबों का घोड़ा एक लम्बी रचना है जिसे में काफी दिनों से लिख रहा हूँख्वाबो के घोडे की कुछ पंक्तियाँ पुण्या की आमद और आज अपने जन्म दिन पर मैं पुण्या और सभी बच्चों तनु परी जय रान्या जय (द्वितीय) वीरू गोल बुआ, मानव रूपल श्रेणु करण , हर्ष स्वराज आदि सभी को नज़र कर रहा हूँ

परियों के देश से पकड़ा
हट्टा कट्टा और तगड़ा
ख्वाबो का एक घोड़ा
चलता
नही है उड़ता है
ख्वाबो
का घोड़ा

जादू जाने करतब जाने थोड़ा
इसकी
लगाम रेशमवाली
जादू
वाला घोड़ा
ख्वाबों
का घोड़ा

सफ़ेद ऐसा दूध जैसा
इस
की दुम पर रुपया पैसा
तारों
की अचकन बांधे
पहने कुरता और पैजामा
ख्वाबों
का घोड़ा

आस्मां लगता है थोड़ा
जब
दौडे ख्वाबों का घोड़ा
सातों
आस्मां दौड़ लगाये
दूर
दूर की सैर कराये
ख्वाबों
का घोड़ा

चाबुक नही चलाना इस पे
नही मारना कोडा
दुम
उठा के भागे सबके आगे
ख्वाबों
का घोड़ा

चढ़े
चढाई अढाई सौ कोस
पैरों पर जम जाए ओस
कोस
कोस उड़ता ही जाए
ख्वाबों
का घोड़ा

परियां
बैठे इस घोडे पर
बैठे
सारे बच्चे
सबको
लेकर खूब घुमाये
दुनिया
भर की सैर कराये
ख्वाबों
का घोड़ा

खतरे
इसके खेल हो जैसे
नही
डरे ऐसे या वैसे
पैरों
इसके पंख लगे हैं
उड़नखटोला
ख्वाबों का घोड़ा

आस्मां की घांस चबाये
काजू पिस्ता बादाम मिलाये
चाँद
के दूध से कुल्फी जमाये
चुस्की लेता पीता सोडा
ख्वाबों का घोड़ा

गोरे गोरे गालों पे इसके
दे दो गुलाबी बोसा
खुश
हो जाता इतने में ही
हिन्
हिनाता ख्वाबों का घोड़ा

जुबा जाने हिन्दी अरबी उर्दू
फारसी
अंग्रेजी थोड़ा
जुमले बोले हिन् हिन् कर
भुन्ना सा ख्वाबों का घोड़ा

गुलज़ार ** ने लकड़ी से तराशा
आस्मां
पे हमने पहुँचाया
उड़ना
इसने सीखा हमसे
पुण्या का अलबेला घोड़ा
ख्वाबों
का घोड़ा

आस्मां लगता है थोड़ा
जब दौडे ख्वाबों का घोड़ा
सातों
आस्मां दौड़ लगाये
दूर
दूर की सैर कराये
ख्वाबों
का घोड़ा

"***गुलज़ार सहाब ने लकड़ी की काठी पर हमें बचपन में घोड़ा दिया ..वो घोड़ा अब आस्मां पर उड़ रहा है ...पुण्या नन्हे मुन्नों के साथ इस घोडे पर उडो आस्मां की सैर करो ..."

Saturday, 13 December, 2008

देखोगे ख्वाब


हकीकत भी होंगे
सच भी होंगे
देखोगे ख्वाब तो पूरे होंगे !!

ज़मीन पे उतर आयेगी जन्नत
सच भी होंगे,हकीकत भी होंगे
देखोगे ख्वाब तो पूरे भी होंगे !!

ज़िंदगी को मत जीना कभी
होकर उदास
रूखी रूखी रुठी रुठी
मत रखना दिल की किताब

रंग भी होंगे तरंग भी होगी
जिन्दगी पूरी लगेगी
एक दिया जलाना
ख़ुद पर एतबार का

एक लौ जलाना
एक लगन लगाना
जिन्दगी बनाने
की

हर लम्हा खुशी की सौगात लाएगा
खुश रहोगे तुम तो सारा आलम
सारा मंज़र हसीन नज़र आएगा

सच होंगे पूरे होंगे
देखोगे ख्वाब तो पूरे भी होंगे !!

Friday, 12 December, 2008

मायूसी मुंबई की


कहाँ तो तय किया था
मुंबई
का जख्म नही भूलना है
मायूसी मुंबई की लगता है
हम सबने भुला दी
बीते दिनों ...
सियासत
की गोद में जाकर
हम
लोगो ने ही
सियासी
जीत का जश्न मनाया
जिस सियासत पर उबला था
हमारा
गुस्सा
वो
सियासत के कदमों तले
बिछाते फूल नज़र आया
माफ़
करना मुंबई के दर्द
हम
तुझे भूल गए
सियासी
जश्नों जुलूसों के शोर में
पीड़ा की कराहे आहे दब गई
हम
क्या इतने भाव हीन हैं
क्या
हम इतने भाव शून्य हैं
मुंबई
तेरी मायूसी मुंबई तेरा दर्द
लगता
है हमें अब बाट रहा है
तेरे
नाम पर अब जात मजहब
का
तमाशा भी चल रहा है
कोई माकूल हल अभी नही
इस
बेबसी का हमारे पास
तेरे
दर्द से बड़ा हो गया है
वोट
बैंक का सवाल
दर्द तेरा अब
सियासी
तमाशा है
यही
इस दर्द की भाषा है
मुंबई
तेरा दर्द सियासत
अपने
अपने नज़रिए से देख रही है
तेरे
दर्द की परवाह किसे
सियासत
तेरे नाम पर
सियासी की रोटियां सेंक रही है
मुंबई तेरा दर्द चुनावी मुद्दा है
इतना ही इस दर्द का माद्दा है
हम
बट गए हमें भरमा दिया है
जो नही बटे है वो भी बट जायेंगे
वक्त
अभी भी है हम माकूल जवाब दे
दहशत की फसल को जड़ से ही उखाड़ दे
मुंबई तेरी मायूसी
मेरी दुआ है
अब
सियासत बने
कभी
तो जागे हम
सबका
ईमान
कभी
तो जागे
हम
सबका इन्सान

(मुंबई में हमले के बाद सियासत अपना चेहरा छिपाते नज़र आईलोगो का गुस्सा फूटालेकिन ये तो अतीत की बात हैपाँच राज्यों के विधानसभा नतीजे आने के बाद हमारे नेताओं और हमारी आवाम ने जीत का जश्न बेशर्मी से सडको पर जुलुस निलकर मनायामुंबई की मायूसी जीत हार का चुनावी गणित बन गईकाश ! हमारे नेता और हम चुनाव के नतीजे आने के बाद मुंबई की मायूसी से ख़ुद को जोड़ते हुए "शान्ति मार्च " निकालतेएक नई पहल करते !!!)

****अभी अभी हमारे प्रधानमंत्री ने दहशत गर्दो के खिलाफ कड़ी कार्रवाही का ऐलान किया है .

Monday, 8 December, 2008

कल रात ख्वाब में


सर्द कोहरे की रात
कोहसारे पेड़ जैसे सब
छिप से गए
छिप गया चाँद भी
और आसमान के तारे भी

कोई शीशे से ख्वाब
फ़िर सैर पर निकले
आँखों से झलकते
झिलमिलाते तारों की तरह

उस कोहरे में खुली
आँखों से कुछ भी दिखाई
नही देता था
सर्द हवा बहने लगी

और ख्वाब
वो तो मुलायम रेशम की
मानिंद मेरे साथ बहते रहे

जो खुली आँखों से दिखाई
नही दिया कोहरे में
वो एक एक कर दिखने
लगा बंद आँखों में
आँखों से जैसे परदे उठने लगा
कल रात .....
ख्वाब में ....
खुदा
ही था शायद मेरे!!!

Friday, 5 December, 2008

ज़रा सोचना


ज़रा एक बार
ये भी सोचना
ज़रा एक बार
ये ख़ुद से भी पूछना
ख़ुद से आँख भी मिलाना
ज़रा ये बात ख़ुद को
भी बताना

क्या हम भी नही हैं दोषी
इन धमाकों के ?
क्या ये वो हम ही नही
जो बिना पड़ताल के
रख लेते हैं अपने घरों में
किरायदार

क्या ये वो हम ही नही हैं
जो दे देते है अपने माहौल में
दहशतगर्दो को पनाह

क्या ये वो हम ही नही हैं
जो हमेशा अपनी निगाहें
फेर कर रखते हैं
अपने आस पास के माहौल से
हमारे बीच में
दहशत
गर्द जाते है ?
और हम समझ भी नही पाते है!

क्या हमारी निगाहों ने
कभी किसी पर शक किया है .
ज़रा एक बार
ये ख़ुद से भी पूछना
ज़रा एक बार
ये भी सोचना

क्या ये वो हम ही नही
जो चुन लेते हैं
भ्रष्ट और निक्कमे नुमाइंदे

आख़िर कब तक हम भी
अपनी ज़िम्मेदारी से मुहं मोडेंगे ?
हमें चौकन्ना बनना होगा
हमें सजग रहना होगा

अपने आस पास के माहौल
पर नज़र रखनी होगी
कोई दहशत गर्द हमारे
बीच में फ़िर आए
कोई भ्रष्ट निकम्मा नुमाइंदा
हमारे वोट से संसद में जाए

रहना होगा होशियार
हम सबको बनाना होगा जिम्मेदार
अपने देश का सजग पहरेदार

(चित्र :बीबीसीहिन्दी डॉट कॉम )