चलो उंगली पे अपनी
आस्माँ उठाये
थोड़े से फूल चांद पे भी उगाये
सितारों को टोकरी मे भरके
जमी पे ले आयें
कभी जमी को ऊपर तो
कभी आस्माँ को नीचे ले आए
खुशियाँ मनाएं /सब गुनगुनायें
कितने दिनों से सूरज नहाया नही है
थोड़ा सा साबुन इसको भी लगाये
पानी का फौव्वारा इस पे भी चलाये
कभी जमी को ऊपर तो
कभी आस्माँ को नीचे ले आए
खुशियाँ मनाएं /सब गुनगुनायें ।
बादल के गाँव मे चलकर
थोडी नाव चलाये
पानी भरा है उसके पेट मे
थोडी गुदगुदी भी लगाये
उसको गुदगुदी करने से थोड़ा
पानी बरसेगा
पानी पी पी के मोटा हुआ उसका पेट
ज़रा सा पिचकेगा ।
कभी जमी को ऊपर तो
कभी आस्माँ को नीचे ले आए
खुशियाँ मनाएं /सब गुनगुनायें
रुई कात रही है कब से
चांद पे बैठी अम्मा
उसके सफ़ेद बालों मे
चलो थोड़ा सा खिजाब लगाये
कभी जमी को ऊपर तो
कभी आस्माँ को नीचे ले आए
खुशियाँ मनाएं /सब गुनगुनायें
चाँद पे बैठी अम्मा की
चरखी मे थोड़े से रंग लगाये
ताकि दिन मे उसकी रुई के
बादल रंग बिरंगे हो जायें
रंगो की पोटली उसको देके आए
रोज़ देखे रंगीन आसमान
कभी जमी को ऊपर तो
कभी आस्माँ को नीचे ले आए
खुशियाँ मनाएं /सब गुनगुनायें ।