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Saturday, 27 December 2008

ख़ुद को ख़ुदा सोच के देखा


सितारों की चादर पर पैरों को पसार के देखा
शब का नूर उसकी आँखों में देखा

वो गुमशुदा सी रातें कल की बात थी
आज रात भी देखी ,सुबह को भी देखा

उसका नज़र आ जाना ही काफी है
उसके बारे में ही बस सोच के देखा

आज जब इनायत हो ही गई है तो ,
कुछ देर ख़ुद को ख़ुदा सोचके देखा